कानपुर की सियासत में इन दिनों सोशल मीडिया की गर्माहट सीधे थानों तक पहुंच गई है। ताजा मामला चकेरी इलाके का है, जहां विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के खिलाफ फेसबुक पर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष संदीप शुक्ला समेत कई समर्थकों पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
क्या है पूरा मामला?
बीजेपी युवा मोर्चा के मंडल उपाध्यक्ष अंशु गुप्ता ने चकेरी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक, 17 अक्टूबर को फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट कर विधानसभा अध्यक्ष की छवि को धूमिल करने की कोशिश की गई। आरोप है कि यह पोस्ट कांग्रेस के संदीप शुक्ला के समर्थकों द्वारा एक फर्जी आईडी के जरिए की गई थी। इस मामले में तरुण पटवा, अंकित कनौजिया, रवि पटवा और निखिल गुप्ता समेत कई लोगों को नामजद किया गया है।
राजनीतिक रस्साकशी या निजी खुन्नस?
एफआईआर दर्ज होने के बाद कांग्रेस खेमे में भारी आक्रोश है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष संदीप शुक्ला ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बदले की कार्रवाई बताया है। उनका दावा है कि:
- मुकदमा दर्ज कराने वाले खुद आपराधिक छवि के हैं।
- महाराजपुर विधानसभा के मुद्दों को उठाने की सजा कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दी जा रही है।
- पुलिस प्रशासन भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है और कांग्रेसियों की सुनवाई नहीं हो रही।
मायने और प्रभाव
कानपुर में सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के चलते दर्ज हो रहे मुकदमे पुलिस और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाते हैं। चकेरी और जाजमऊ थाने में लगातार कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर दर्ज हो रहे मामले क्षेत्र में बढ़ते तनाव का संकेत हैं। यह घटना बताती है कि अब डिजिटल मंचों पर की गई एक पोस्ट भी बड़े कानूनी पचड़ों में फंसने के लिए पर्याप्त है। आम जनता के लिए यह जरूरी है कि वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल संभलकर करें, क्योंकि एक छोटी सी टिप्पणी भी गंभीर कानूनी धाराओं को न्योता दे सकती है।


