कानपुर-इटावा नेशनल हाईवे पर उस वक्त मातम पसर गया जब एक तेज रफ्तार बाइक पंचर खड़े ट्रैक्टर-ट्रॉली से जा टकराई। इस भीषण हादसे में बाइक सवार मामा और भांजे की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सड़क पर बिखरे खून और चकनाचूर हुई बाइक इस हादसे की भयावहता की गवाही दे रहे थे।
सेंचुरी थाने के पास हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा सचेंडी थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुआ। मृतक अपनी ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहे थे, तभी हाईवे किनारे बेतरतीब ढंग से खड़ा किया गया ट्रैक्टर उनकी मौत का कारण बन गया। कोहरे या रात के अंधेरे की वजह से बाइक सवार ट्रैक्टर को देख नहीं पाए और सीधे ट्रॉली के पिछले हिस्से से टकरा गए।
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश
घटना के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर ट्रैक्टर चालक ने गाड़ी को हाईवे पर न खड़ा किया होता या कोई चेतावनी संकेत (पार्किंग लाइट या रिफ्लेक्टर) लगाया होता, तो आज दो घर उजड़ने से बच सकते थे।
मायने और प्रभाव: सड़क सुरक्षा पर बड़े सवाल
यह घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं है, बल्कि सिस्टम की बड़ी लापरवाही को भी दर्शाती है:
- हाईवे पर अवैध पार्किंग: नेशनल हाईवे पर नियम विरुद्ध तरीके से खराब वाहनों को खड़ा करने का चलन जानलेवा साबित हो रहा है।
- प्रशासन की जवाबदेही: पेट्रोलिंग करने वाली पुलिस और हाईवे अथॉरिटी की यह जिम्मेदारी है कि वे सड़क किनारे खड़ी ऐसी गाड़ियों को तुरंत हटवाएं।
- सावधानी का अभाव: रात के समय हाईवे पर चलने वाले वाहन चालकों को भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है, विशेषकर जब सड़कों पर संकेतक कम होते हैं।
प्रशासन ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन सवाल यह है कि कब तक सड़कों पर असुरक्षित खड़े वाहनों से आम नागरिक अपनी जान गंवाते रहेंगे?



