घर की चारदीवारी जिसे सुरक्षा का कवच माना जाता है, फर्रुखाबाद में उसी जगह एक महिला की अस्मत लूट ली गई। रिश्तों को तार-तार करने वाली यह घटना तब घटी जब पीड़िता अपने घर के बरामदे में सो रही थी। आरोप है कि उसके ही जेठ ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया और विरोध करने पर उसे खौफनाक अंजाम भुगतने की धमकी दी।
न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुआ मुकदमा
पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि जब उसने शोर मचाने की कोशिश की, तो आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया। डर के साये में जी रही महिला ने जब पुलिस से गुहार लगाई और सुनवाई नहीं हुई, तो उसे न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
अदालत के सख्त आदेश के बाद आखिरकार पुलिस ने आरोपी जेठ के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्यों के आधार पर जांच तेज कर दी गई है।
समाज में गिरते नैतिक मूल्यों पर सवाल
अपनों के हाथों ही इस तरह की दरिंदगी समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। एक ऐसा घर जो महिला के लिए सबसे सुरक्षित स्थान होना चाहिए था, वहां ऐसी घटना ने इलाके में दहशत पैदा कर दी है।
मायने और प्रभाव
- कानूनी लड़ाई की अहमियत: यह मामला साबित करता है कि जब स्थानीय पुलिस से उम्मीदें खत्म हो जाती हैं, तब न्यायपालिका ही अंतिम सहारा बचती है।
- सुरक्षा का सवाल: घरेलू हिंसा और पारिवारिक अपराधों में अब महिलाओं को अधिक सतर्क और मुखर होने की जरूरत है।
- सामाजिक हकीकत: रिश्तों में विश्वास की कमी और अपराधियों के मन में कानून का डर कम होना समाज के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए टीमें गठित कर दी हैं। अब देखना यह है कि कानून इस दरिंदगी के लिए आरोपी को किस हद तक सजा दिला पाता है।




