आगरा के प्रतिष्ठित आगरा कॉलेज के छात्रों का सब्र का बांध आखिरकार टूट गया है। बीए, बीएससी और बीकॉम के सैकड़ों विद्यार्थी मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की दहलीज पर अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए। मामला सीधा सा है, लेकिन छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है—दो बार री-एग्जाम देने के बाद भी परिणाम का कोई अता-पता नहीं है और अब जब वे तीसरी बार फॉर्म भरना चाहते हैं, तो पोर्टल बंद कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। पहले री-एग्जाम हुए, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी रिजल्ट घोषित नहीं किए गए। परिणाम न आने के कारण छात्र यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें आगे की कक्षाओं के लिए फॉर्म भरना है या नहीं।
अब स्थिति यह हो गई है कि परीक्षा फॉर्म भरने का आधिकारिक पोर्टल भी बंद कर दिया गया है। छात्र इस बात से डरे हुए हैं कि अगर पोर्टल नहीं खुला, तो उनका एक पूरा साल बर्बाद हो सकता है।

छात्रों की मुख्य मांगें
- रुके हुए री-एग्जाम के परिणामों को तुरंत घोषित किया जाए।
- परीक्षा फॉर्म भरने के लिए पोर्टल को फिर से खोला जाए।
- लेट लतीफी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय हो।
मायने और प्रभाव: छात्रों के लिए क्यों जरूरी है यह?
यह प्रदर्शन केवल कुछ छात्रों की नाराजगी नहीं, बल्कि प्रदेश के उच्च शिक्षा तंत्र की एक बड़ी विफलता को दर्शाता है। जब शैक्षणिक कैलेंडर ही समय पर नहीं चलेगा, तो छात्रों का करियर आगे कैसे बढ़ेगा? आगरा कॉलेज जैसे पुराने संस्थान में अगर छात्र अपनी पढ़ाई छोड़कर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, तो यह सीधे तौर पर विश्वविद्यालय की प्रशासनिक शिथिलता की ओर इशारा करता है।
समय पर रिजल्ट न आना और पोर्टल बंद होने से न केवल छात्रों का साल खराब होने का डर है, बल्कि उनके मानसिक तनाव को भी बढ़ाता है। अगर प्रशासन ने समय रहते पोर्टल नहीं खोला और रिजल्ट जारी नहीं किए, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र हो सकता है।



