यमुना एक्सप्रेसवे की रफ्तार एक बार फिर जानलेवा साबित हुई है। मथुरा के नौहझील थाना क्षेत्र में बीती रात हुई एक भीषण दुर्घटना ने दो परिवारों से उनके चिराग छीन लिए। सड़क के किनारे बेबस खड़ी एक पिकअप गाड़ी काल का ग्रास बन गई, जब पीछे से आ रही एक दूसरी तेज रफ्तार पिकअप ने उसमें जोरदार टक्कर मार दी।
कैसे हुआ हादसा?
घटनाक्रम के मुताबिक, माइलस्टोन 63 के पास एक पिकअप का अचानक एक्सल टूट गया था, जिसके चलते चालक उसे सड़क किनारे खड़ा करने पर मजबूर हो गया। देर रात का वक्त था और अंधेरे के कारण पीछे से आ रहे वाहन चालक को खड़ी गाड़ी का अंदाजा नहीं लगा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए।
अस्पताल में तोड़ा दम
हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए दो लोगों को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक बिहार के रहने वाले बताए जा रहे हैं, जो रोजी-रोटी की तलाश में इस हाईवे से गुजर रहे थे। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, जबकि टक्कर मारने वाली गाड़ी का ड्राइवर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया है।
मायने और प्रभाव
यह हादसा यमुना एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के उन बड़े सवालों को फिर से खड़ा करता है जो अक्सर अनदेखे कर दिए जाते हैं।
- हाईवे पर सावधानी: खराब गाड़ी को सड़क पर खड़ा करना कितना खतरनाक हो सकता है, यह घटना उसका जीता-जागता उदाहरण है।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल: एक्सप्रेसवे पर तकनीकी खराबी आने पर रिफ्लेक्टर्स और पार्किंग लाइट का सही इस्तेमाल जान बचा सकता है।
- प्रशासन की जिम्मेदारी: लगातार हो रहे हादसों के बाद भी एक्सप्रेसवे पर गश्त और निगरानी का अभाव आम लोगों के लिए चिंता का विषय है।
अंधेरे रास्तों पर तेज रफ्तार और लापरवाही का यह संगम किसी भी परिवार को तबाह कर सकता है। प्रशासन को अब हाईवे पर खड़े वाहनों के लिए सख्त नियम और क्विक रिस्पॉन्स टीम की सक्रियता पर दोबारा काम करने की जरूरत है।

