करवा चौथ की खुशियां मातम में बदलीं
कानपुर में करवा चौथ का त्यौहार एक नवविवाहिता के लिए आखिरी साबित हुआ। जिस दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र की कामना कर रही थीं, उसी दिन शहर के एक घर से आई मौत की खबर ने सबको झकझोर कर रख दिया। संदिग्ध हालात में हुई मौत के बाद जब मायके वाले अस्पताल पहुंचे, तो उन्होंने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।
दहेज का खूनी खेल?
परिजनों का सीधा आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल वाले दहेज की मांग कर रहे थे। मृतका के मायके वालों का दावा है कि उनकी बेटी से बुलेट और सोने की चेन की मांग की गई थी। करवा चौथ पर शगुन न मिल पाने के बाद विवाद बढ़ा और बात जान लेने तक पहुंच गई।
तीन घंटे तक चली गहमागहमी
पोस्टमार्टम के बाद जब शव परिजनों को सौंपा जा रहा था, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मायके वाले शव को लेने से इनकार करते हुए पुलिस प्रशासन के सामने अड़ गए। करीब तीन घंटे तक पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामा चलता रहा। परिजन इस बात पर जोर दे रहे थे कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
मायने और प्रभाव
यह घटना समाज में गहराई तक व्याप्त दहेज प्रथा की कुरीति को उजागर करती है। इसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- कानून की सख्ती की जरूरत: नवविवाहिता की मौत का यह मामला साबित करता है कि दहेज लोभी कानून के डर से अब भी दूर हैं।
- पारिवारिक सामंजस्य: ऐसे मामले समाज में असुरक्षा की भावना पैदा करते हैं और रिश्तों की नींव को हिलाकर रख देते हैं।
- पुलिस की भूमिका: तीन घंटे तक चले हंगामे ने स्पष्ट कर दिया है कि जनता का तंत्र पर भरोसा तभी कायम रहेगा जब त्वरित कार्रवाई होगी।
स्थानीय पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर ली है और जांच जारी है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा।





