अलीगढ़ के दूधमा गांव में इन दिनों मातम पसरा है। तेज बुखार ने एक 8 साल की मासूम हिमानी की जान ले ली है, जबकि गांव के एक दर्जन से अधिक लोग इसी तरह के लक्षणों के साथ अस्पतालों में भर्ती हैं। इस घटना के बाद पूरे इलाके में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और फैलती बीमारी को लेकर गहरा रोष और दहशत का माहौल है।
क्या है पूरा मामला?
हिमानी की मौत के बाद ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया है। परिजनों का कहना है कि बच्ची को कुछ दिन से बुखार था, लेकिन हालत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। यह इस गांव में बुखार से हुई मौत का कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले 11 अक्टूबर को इसी गांव की रहने वाली रूमाली देवी ने भी इसी तरह के बुखार के कारण दम तोड़ दिया था।
स्वास्थ्य विभाग की खामोशी पर सवाल
एक के बाद एक मौत और लगातार बढ़ते बीमारों की संख्या ने प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है। गांव वालों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए।

- गांव में जांच शिविरों का भारी अभाव है।
- साफ-सफाई और जलभराव की समस्या बरकरार है।
- बीमार लोगों की बढ़ती तादाद से ग्रामीणों में डर का माहौल है।
मायने और प्रभाव
यह मामला केवल एक गांव की त्रासदी नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे की बदहाली का एक बड़ा संकेत है। मौसमी बीमारियों का सही समय पर इलाज न मिल पाना और स्वास्थ्य केंद्रों की अनदेखी आम जनता के लिए जानलेवा साबित हो रही है। अगर स्थानीय प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेकर गांव में फॉगिंग, एंटी-लार्वा स्प्रे और मेडिकल कैंप नहीं लगाए, तो यह संक्रमण और भी खतरनाक रूप ले सकता है। सरकार को इन घटनाओं से सबक लेकर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने की जरूरत है, ताकि फिर किसी मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़े।




