कानपुर सेंट्रल के आउटर पर ट्रेन की धीमी रफ्तार का फायदा उठाकर यात्रियों को अपना निशाना बनाने वाले एक शातिर गैंग का पर्दाफाश हुआ है। जीआरपी ने रविवार तड़के तीन ऐसे लुटेरों को दबोचा है, जो खिड़की के पास बैठे लोगों के हाथ से मोबाइल उड़ाकर रफूचक्कर हो जाते थे।
कैसे काम करता था लुटेरों का यह गैंग?
जीआरपी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बाबूपुरवा की सफेद कॉलोनी निवासी शादाब खान उर्फ साहिल, अरबाज और मोहम्मद आसिफ उर्फ ब्रावो के रूप में हुई है। ये तीनों युवक महज 20 से 21 साल की उम्र के हैं। इनका तरीका बेहद खतरनाक था। ये शहर के आउटर इलाकों में छिपकर ट्रेन का इंतजार करते थे। जैसे ही ट्रेन की रफ्तार धीमी होती, ये मौका पाकर खिड़की या दरवाजे के पास बैठे यात्रियों के मोबाइल पर झपट्टा मारते थे।
पुलिस की गिरफ्त में शातिर
जीआरपी प्रभारी निरीक्षक ओमनारायण सिंह ने बताया कि इन तीनों को हैरिसगंज पुल के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस को इनके पास से करीब दो लाख रुपये कीमत के तीन महंगे मोबाइल बरामद हुए हैं। पूछताछ में सामने आया है कि ये सभी मोबाइल कानपुर सेंट्रल जीआरपी थाने में दर्ज अलग-अलग चोरी के मामलों से जुड़े हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इनमें से कुछ आरोपी पहले भी अपराधों में संलिप्त रहे हैं, जिनके खिलाफ ग्वालटोली थाने में भी मुकदमे दर्ज हैं।
मायने और प्रभाव: आम यात्रियों पर क्या असर?
यह गिरफ्तारी कानपुर जैसे बड़े जंक्शन से गुजरने वाले लाखों यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। शहर के आउटर इलाकों में इस तरह की वारदातों ने रेलवे सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
- इसके मायने ये हैं:
- यात्रियों की सुरक्षा: अब यात्रियों को ट्रेन के धीमे होने पर खिड़कियों से दूर रहने की जरूरत है, क्योंकि लुटेरे अक्सर ‘धीमी गति’ को अपना हथियार बनाते हैं।
- पुलिस की सक्रियता: पुलिस ने इन लुटेरों को धर दबोचा है, जिससे इन गैंग्स में खौफ पैदा होगा और अपराध दर में कमी आने की उम्मीद है।
- सतर्कता जरूरी: भले ही आरोपी पकड़े गए हैं, लेकिन यात्रा के दौरान अपने सामान और गैजेट्स का ध्यान रखना अब भी आपकी अपनी जिम्मेदारी है।


