उन्नाव के नेशनल हाईवे पर शुक्रवार शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। कानपुर के स्कूली बच्चों को टूर से वापस ले जा रही एक प्राइवेट स्कूल बस में अचानक भीषण आग लग गई। बस से धुआं और आग की लपटें निकलते ही हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई, लेकिन गनीमत रही कि समय रहते सभी छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
कैसे हुई घटना?
जानकारी के मुताबिक, स्कूल बस छात्रों को टूर कराकर वापस लौट रही थी। जैसे ही बस उन्नाव क्षेत्र के हाईवे से गुजरी, अचानक इंजन के पास से धुआं उठने लगा। देखते ही देखते आग ने बस के अगले हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। बस के अंदर सवार बच्चों में चीख-पुकार मच गई।
चालक की सूझबूझ और स्थानीय लोगों की मदद से सभी बच्चों को तुरंत बस से नीचे उतार लिया गया। कुछ ही पलों में आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद अभिभावकों में काफी आक्रोश है। सवाल ये उठता है कि क्या बस की फिटनेस की जांच हुई थी? ऐसी घटनाओं से पता चलता है कि स्कूली वाहनों की समय-समय पर टेक्निकल जांच कितनी जरूरी है।
मायने और प्रभाव
- जिम्मेदारी का प्रश्न: स्कूल मैनेजमेंट की यह जिम्मेदारी है कि बच्चों को ले जाने वाली गाड़ियां हर स्तर पर फिट हों।
- सख्ती की जरूरत: परिवहन विभाग को स्कूलों में चलने वाली पुरानी और जर्जर बसों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने की जरूरत है।
- सतर्कता का सबक: चालक की तत्परता ने आज एक बड़ी त्रासदी को रोक लिया, जो यह साबित करता है कि आपातकालीन स्थितियों के लिए प्रशिक्षण कितना अनिवार्य है।
फिलहाल, सभी छात्र पूरी तरह सुरक्षित हैं और घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शॉर्ट सर्किट की वजह क्या थी।


