अलीगढ़ की सड़कों पर शनिवार देर शाम उस वक्त सियासी पारा चढ़ गया, जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में जलती मशालें लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाने पर लेते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।
सड़कों पर गूंजे नारे
शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए कांग्रेसियों का यह मशाल जुलूस आकर्षण का केंद्र बना रहा। प्रदर्शनकारियों के हाथों में मशालें थीं और उनकी जुबान पर ‘वोट चोर-गद्दी छोड़’ और ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ जैसे तीखे नारे थे। यह विरोध प्रदर्शन चुनाव प्रक्रिया में कथित धांधली के आरोपों को लेकर किया गया है।
पूर्व विधायक ने उठाए सवाल
इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पूर्व विधायक विवेक बंसल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। बंसल ने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए एक बेहद गंभीर और चिंताजनक संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह से वोटों के आंकड़ों में हेरफेर और चोरी की खबरें सामने आ रही हैं, वे जनता के भरोसे को तोड़ने वाली हैं।
मायने और प्रभाव
इस विरोध प्रदर्शन के राजनीतिक मायने काफी गहरे हैं। चुनाव आयोग पर सवाल उठाने का मतलब सीधे तौर पर चुनावी निष्पक्षता पर दबाव बनाना है। इसके प्रभाव निम्नलिखित हो सकते हैं:
- जनता के बीच अविश्वास: लगातार हो रहे ऐसे प्रदर्शन आम लोगों के मन में भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा करते हैं।
- बढ़ता सियासी टकराव: चुनाव आयोग बनाम विपक्ष का यह टकराव आने वाले दिनों में और अधिक उग्र हो सकता है।
- संवैधानिक संस्थाओं की साख: चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर उठ रहे ये सवाल लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर बड़ी बहस छेड़ रहे हैं।



