कानपुर के पॉश इलाकों के बीच बसी एक ऐसी जगह है, जिसका नाम अब लोग बदल चुके हैं। कभी काजीखेड़ा के नाम से जानी जाने वाली यह गली अब स्थानीय लोगों के बीच ‘गांजे वाली गली’ के तौर पर कुख्यात हो रही है। यहाँ दिन ढलते ही नहीं, बल्कि सूरज की रोशनी में भी सरेआम नशे का कारोबार और महफिलें सजती हैं।
सरेआम बिक रहा नशा, पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ वीडियो ने इस पूरे इलाके की पोल खोल दी है। इन वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे गलियों के मुहाने पर खड़े होकर बेखौफ तरीके से गांजे की पुड़िया बेची जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहाँ आने वाले ‘गंजेड़ियों’ के कारण अब महिलाओं और बच्चों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।
- दिनदहाड़े कारोबार: सुबह होते ही शुरू हो जाती है नशेडियों की आवजाही।
- सामाजिक सुरक्षा पर संकट: मोहल्ले के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि इस अड्डे के कारण माहौल खराब हो रहा है।
- पुलिस की चुप्पी: स्थानीय लोगों के तमाम दावों के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
मायने और प्रभाव: क्यों चिंता का विषय है यह?
कानपुर जैसे बड़े शहर में इस तरह के ‘ओपन ड्रग हब’ का पनपना न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी एक बड़ा खतरा है। जब किसी एक गली को ‘गांजे वाली गली’ के रूप में पहचाना जाने लगे, तो यह साफ संकेत है कि नशे का नेटवर्क स्थानीय स्तर पर बहुत गहरा हो चुका है।
इस तरह की जगहें अपराध का केंद्र बनती हैं, क्योंकि नशे की लत को पूरा करने के लिए युवा अक्सर चोरी और छीना-झपटी जैसी वारदातों की ओर मुड़ जाते हैं। अगर प्रशासन ने वक्त रहते इस ‘गांजे वाली गली’ पर ताला नहीं लगाया, तो यह समस्या पूरे शहर की शांति व्यवस्था को अपनी चपेट में ले सकती है। अब गेंद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के पाले में है कि वे कब तक इस अवैध अड्डे को खत्म करते हैं।



