कुशीनगर के खेतों में अक्सर केले की फसल काटने के बाद किसान तनों को यूं ही सड़ने के लिए छोड़ देते हैं, लेकिन अनिता राय ने इसी ‘कचरे’ में अपनी सफलता की नई इबारत लिख दी है। जो लोग इसे बेकार समझकर फेंक देते थे, आज वही तना अनिता के लिए कमाई का जरिया बन चुका है।
खेती के कचरे से शानदार प्रोडक्ट
अनिता राय ने केले के तने के रेशों और अर्क का इस्तेमाल कर एक ऐसा स्टार्टअप खड़ा किया है जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहतरीन है। उनके पास उत्पादों की एक लंबी फेहरिस्त है, जिसमें केले के तने का जूस, फाइबर से बना आटा, चिप्स, अचार और बैग शामिल हैं।
ऑर्गेनिक उत्पादों की बढ़ती मांग
अनिता की सबसे बड़ी खासियत है इनका ‘केमिकल फ्री’ मॉडल। वे पूरी प्रक्रिया में किसी भी कृत्रिम रंग या रसायन का इस्तेमाल नहीं करती हैं। वे बताती हैं कि केले के तने में मौजूद औषधीय गुण जब शुद्ध तरीके से लोगों तक पहुँचते हैं, तो उनकी मांग खुद-ब-खुद बढ़ जाती है।
बाजार और सरकारी प्रोत्साहन
- ओडीओपी (ODOP) का साथ: अनिता के उत्पादों को अब उत्तर प्रदेश सरकार की ‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना से बड़ा मंच मिला है।
- गोरखपुर में पहचान: गोरखपुर के प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में उनका अपना स्टोर है, जहां पर्यटक उनके द्वारा बनाए गए ऑर्गेनिक उत्पादों को खूब पसंद करते हैं।
- रोजगार का सृजन: इस स्टार्टअप के जरिए अनिता ने न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़ा है।
मायने और प्रभाव
अनिता राय की यह पहल दिखाती है कि अगर दृष्टिकोण सही हो, तो बेकार समझी जाने वाली चीजों से भी बड़ी आर्थिक क्रांति लाई जा सकती है। कुशीनगर जैसे कृषि प्रधान जिलों के लिए यह मॉडल एक प्रेरणा है। यह न केवल कचरा प्रबंधन का बेहतर उदाहरण है, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने के सपने को पूरा करने में भी एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।




