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मथुरा जन्माष्टमी 2026: श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कान्हा के जन्म की पहली तस्वीर, घर-घर गूंजे बधाई गीत

मथुरा की पावन नगरी एक बार फिर ‘कृष्णमय’ हो गई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर आधी रात को जैसे ही घड़ी की सुइयां 12 पर पहुंचीं, पूरा परिसर ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों से गूंज उठा। कान्हा के प्राकट्य के साथ ही मंदिर के पट खुले और आराध्य की पहली झलक पाते ही लाखों श्रद्धालुओं की आंखें भर आईं।

योगी आदित्यनाथ ने किए दर्शन, उत्सव में डूबी ब्रज की गलियां

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचकर ठाकुरजी का आशीर्वाद लिया। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान जन्मस्थान पर शंखनाद, ढोल-नगाड़ों और मृदंग की थाप ने पूरे वातावरण को अलौकिक बना दिया।

भागवत भवन में रजत कमल पुष्प पर विराजमान भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक हुआ। भक्तगण इस पल का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, जहां हर कोई अपने कान्हा को निहारने के लिए आतुर दिखा।

27 मंचों पर ‘मिनी भारत’ की झलक

इस बार मथुरा में 27 अलग-अलग मंच सजाए गए हैं, जहां देश के विभिन्न कोनों से आए कलाकार अपनी लोक कलाओं के जरिए भगवान की लीलाओं का मंचन कर रहे हैं। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में भी विशेष तैयारियां की गई हैं, जहां पहली बार 21 किलो का केक अर्पित किया जाएगा।

मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों है खास?

आस्था और अर्थव्यवस्था का संगम: मथुरा की जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह पूरे ब्रज क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक महा-पर्व है। लाखों श्रद्धालुओं के आने से स्थानीय पर्यटन, हस्तशिल्प और सेवा क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलती है।

  • सामाजिक समरसता: इस उत्सव में न केवल मथुरा, बल्कि हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर से भी भक्त बड़ी संख्या में पहुंचते हैं, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश देता है।
  • सांस्कृतिक विरासत: 27 मंचों के जरिए लोक कलाओं का प्रदर्शन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बन रहा है।
  • प्रशासनिक तैयारी: भीषण भीड़ के बावजूद शांतिपूर्ण आयोजन यह दर्शाता है कि मथुरा अब बड़े वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में अपनी क्षमता को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर रहा है।

जैसे-जैसे उत्सव आगे बढ़ रहा है, नंदगांव में होने वाले ‘नंदोत्सव’ की तैयारी ने भी जोर पकड़ लिया है। छह सितंबर को ब्रज की गलियों में होने वाली वह धूम फिर देखने को मिलेगी, जिसे देखने के लिए भक्त पूरे साल इंतजार करते हैं।

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