लखीमपुर खीरी के नेपाल सीमा से सटे इलाकों में एक बार फिर कुदरत का कहर देखने को मिल रहा है। मोहाना नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से तटीय गांवों में हड़कंप मच गया है। नदी का पानी अब लोगों के घरों की दहलीज तक पहुंच चुका है, जिससे ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गई है।
जसनगर और केवटली में भारी कटान
मोहाना नदी की धारा ने जसनगर और केवटली गांवों के पास अपना रुख मोड़ लिया है। नदी का कटाव इतना तेज है कि जमीन का बड़ा हिस्सा देखते ही देखते पानी में विलीन हो रहा है। स्थानीय निवासी शिवभगवान, रामकुमार और गोवर्धन जैसे कई लोगों के घर अब खतरे की जद में आ गए हैं।
स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल
गांव के लोगों का कहना है कि अगर नदी का यह कटान नहीं रुका, तो आने वाले दिनों में कई और परिवार बेघर हो सकते हैं। प्रशासन की ओर से हालात पर नजर रखी जा रही है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते बचाव कार्य शुरू न होने से स्थिति विकट हो गई है।
- मुख्य चिंताएं:
- खेतों की उपजाऊ जमीन का नदी में समाना।
- घरों की नींव कमजोर होना और डूबने का खतरा।
- नेपाल सीमा से सटे रास्तों का कटाव।
मायने और प्रभाव
लखीमपुर खीरी में बाढ़ और कटाव का यह संकट हर साल एक बड़ी चुनौती बनकर उभरता है। इसका सीधा असर न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, बल्कि सीमावर्ती सुरक्षा और आमजन के जीवन स्तर को भी प्रभावित करता है। उपजाऊ जमीन कटने से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। यह स्थिति मांग करती है कि प्रशासन स्थायी समाधान के तौर पर पक्का तटबंध निर्माण और समय रहते जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था करे, ताकि नेपाल सीमावर्ती इन गांवों को बचाया जा सके।




