आगरा में टैक्स चोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभागीय अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं। एक बोगस फर्म के नाम पर करीब 7.77 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) डकारने की साजिश रची गई। यह खेल पूरी तरह कागजों पर चला, जबकि हकीकत में न तो कोई कंपनी मौजूद थी और न ही वहां कोई व्यापारिक गतिविधि।
जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल
राज्य कर विभाग की टीम ने जब इस फर्म के पंजीकृत पते की जांच की, तो वहां का मंजर देखकर अधिकारी सन्न रह गए। जिस पते पर कंपनी का दफ्तर होना चाहिए था, वहां न तो कोई गोदाम मिला और न ही स्टॉक का नामो-निशान। विभाग को एक भी दस्तावेज नहीं मिला, जिससे यह साफ हो गया कि यह फर्म सिर्फ सरकारी खजाने को लूटने के लिए बनाई गई थी।
लोहामंडी थाने में दर्ज हुआ मुकदमा
इस मामले को लेकर राज्य कर विभाग ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया है। विभाग की शिकायत पर लोहामंडी थाने में फर्म संचालक के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब इस फर्जीवाड़े की जड़ों तक पहुंचने के लिए संचालक की धरपकड़ में जुट गई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि फर्जी बिलों के जरिए आईटीसी का गलत दावा करके सरकार को सीधा चूना लगाया गया।
मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर
इस तरह के घोटाले सिर्फ सरकारी राजस्व का नुकसान नहीं हैं, बल्कि ये ईमानदार व्यापारियों के लिए भी मुश्किल खड़ी करते हैं। जब कोई फर्जी फर्म टैक्स चोरी करती है, तो विभाग का पूरा तंत्र संदिग्ध हो जाता है, जिससे आम करदाताओं को भी बार-बार की पड़ताल और कठिन नियमों का सामना करना पड़ता है।
- सीधा नुकसान: देश के विकास कार्यों में खर्च होने वाली जनता की गाढ़ी कमाई का हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है।
- जागरूकता जरूरी: व्यापारियों को सलाह है कि वे किसी भी संदिग्ध फर्म के साथ लेनदेन से बचें, अन्यथा जांच के दायरे में वे भी आ सकते हैं।
- सख्त कार्रवाई: आने वाले दिनों में ऐसी फर्जी फर्मों के खिलाफ आगरा में विभाग का अभियान और तेज होने की उम्मीद है।




