आगरा की सड़कों पर इस वक्त राजनीति का पारा गरमाया हुआ है। वीआईपी (VIP) प्रमुख मुकेश सहनी ने अपने समाज के हक के लिए एक ऐसी लकीर खींच दी है, जिसने यूपी की सियासत में हलचल मचा दी है। आगरा पहुंचे मुकेश सहनी का जोरदार स्वागत हुआ और उनके समर्थकों ने बाइक रैली निकालकर अपनी ताकत का अहसास कराया।
निषाद समाज का संकल्प: हाथ में गंगाजल, जुबान पर आरक्षण
आगरा में कश्यप-निषाद समाज के हजारों युवाओं ने सड़कों पर उतरकर शक्ति प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने हाथ में गंगाजल लेकर कसम खाई कि जब तक निषाद समाज को संवैधानिक एससी आरक्षण नहीं मिल जाता, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। मुकेश सहनी का साफ कहना है कि उनका आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर है।
2027 का चुनाव और भाजपा को अल्टीमेटम
मुकेश सहनी ने मंच से भाजपा सरकार को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समाज को आरक्षण का अधिकार नहीं दिया गया, तो समाज का एक भी वोट भाजपा की झोली में नहीं जाएगा।
- आरक्षण नहीं तो वोट नहीं का नारा बुलंद।
- आगरा में निषाद समाज की एकजुटता का प्रदर्शन।
- आने वाले चुनावों में जातिगत समीकरणों पर असर।
मायने और प्रभाव: यूपी की राजनीति पर क्या होगा असर?
मुकेश सहनी का यह शक्ति प्रदर्शन महज एक भीड़ जुटाने वाली रैली नहीं है, बल्कि यह यूपी के चुनावी गणित को प्रभावित करने वाली एक सोची-समझी रणनीति है। आगरा और उसके आसपास के इलाकों में निषाद और कश्यप समाज की आबादी बड़ी संख्या में है, जो कई विधानसभा सीटों पर हार-जीत तय करने का माद्दा रखती है।
यदि निषाद समाज एकजुट होकर किसी एक विचारधारा के खिलाफ खड़ा होता है, तो सत्ताधारी दल के लिए मुश्किलें बढ़ना तय है। सरकार के लिए अब यह चुनौती बन गई है कि क्या वे इस समुदाय को साध पाएंगे या फिर यह आंदोलन 2027 के चुनाव में भाजपा के लिए बड़ा सिरदर्द साबित होगा।




