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आगरा में भारी बारिश का कहर: नाले में समाए पांच बाइक सवार, धंसी सड़क में फंसी एंबुलेंस

ताज नगरी आगरा में बुधवार को हुई मूसलाधार बारिश ने शहर की बदहाल व्यवस्था और स्मार्ट सिटी के दावों की पोल खोलकर रख दी है। शमसाबाद रोड पर जलभराव इतना खतरनाक हो गया कि देखते ही देखते सड़क किनारे बने ओवरफ्लो नाले में पांच बाइक सवार गिर गए। गनीमत रही कि वहां मौजूद स्थानीय लोगों और सफाईकर्मियों ने समय रहते उन्हें बचा लिया, वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था।

सड़क और नाले का अंतर मिटा, जान पर बन आई बात

शमसाबाद रोड स्थित डबल पेट्रोल पंप के पास स्थिति सबसे भयावह थी। भारी बारिश के चलते सड़क और नाले का स्तर एक समान हो गया, जिससे वाहन चालकों को अंदाजा ही नहीं मिला कि सड़क कहां खत्म हो रही है और नाला कहां शुरू। मंदिर के पास से गुजरते समय एक के बाद एक पांच बाइक सवार संतुलन खोकर सीधे नाले में जा गिरे।

  • राजपुर चुंगी इलाके में जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों के लिए निकलना दूभर हो गया।
  • नाले में गिरने से सभी पांचों बाइक सवारों को कोहनी, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आई हैं।
  • क्षेत्रीय दुकानदारों ने मानव श्रृंखला बनाकर पीड़ितों को सुरक्षित बाहर निकाला।

सीएम ग्रिड प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर उठे सवाल

बारिश का कहर सिर्फ नाले तक सीमित नहीं रहा। ‘सीएम ग्रिड’ योजना के तहत बनाई जा रही नई सड़कों की हकीकत भी सबके सामने आ गई। उपाध्याय हॉस्पिटल के सामने सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे एक एंबुलेंस और तीन कारें बुरी तरह फंस गईं। अस्पताल के कर्मचारियों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी तब जाकर गाड़ियां सुरक्षित निकल पाईं।

मायने और प्रभाव: आम जनता पर क्या असर?

यह घटना केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और निर्माण कार्य की लापरवाही का जीता-जागता सबूत है।
इसके गंभीर प्रभाव इस प्रकार हैं:

  • भ्रष्टाचार के संकेत: जिस सड़क का निर्माण कार्य हाल ही में समीक्षा में पास किया गया था, वह पहली ही बारिश में धंस गई, जो निर्माण की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े करता है।
  • सुरक्षा का मुद्दा: यदि समय रहते स्थानीय लोग मदद के लिए नहीं आते, तो नाले में गिरना जानलेवा साबित हो सकता था। आगरा की जलनिकासी व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने की जरूरत है।
  • आर्थिक नुकसान: सड़क धंसने से एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं का फंसना शहर के आपदा प्रबंधन की पोल खोलता है।

आगरा के निवासियों में अब भारी आक्रोश है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक टैक्स देने वाली जनता को जान जोखिम में डालकर घरों से निकलना पड़ेगा? प्रशासन को अब केवल कागजों पर ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने के बजाय धरातल पर नालों की सफाई और सड़कों की गुणवत्ता पर काम करने की जरूरत है।

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