झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और नियुक्ति में देरी के खिलाफ छात्रों का गुस्सा अब राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गया है। रांची के मोरहाबादी मैदान से शुरू हुई यह आग अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है। हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों से मुलाकात कर न केवल उनका दर्द समझा, बल्कि केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है।
छात्रों के कंधे पर हाथ, सत्ता पर निशाने
राहुल गांधी ने स्पष्ट लहजे में कहा कि छात्रों की मेहनत और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘ये मत समझिए कि छात्र कमजोर हैं। उनकी आवाज दबाने की कोशिश देश के भविष्य को अंधकार में धकेलने जैसा है।’
आंदोलन की पृष्ठभूमि और पुलिस कार्रवाई
झारखंड में JSSC और JPSC की परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। छात्रों का आरोप है कि परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी है और नियुक्तियां राजनीतिक मंशा से अटकी हुई हैं। हाल ही में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद मामला और ज्यादा गरमा गया है।
- परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ छात्रों में गहरा आक्रोश।
- कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने छात्रों के प्रदर्शन को दिया समर्थन।
- पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही की मांग।
मायने और प्रभाव: आम छात्रों के लिए क्यों जरूरी है?
इस पूरे घटनाक्रम का सीधा असर आने वाले चुनावों और सरकारी भर्तियों पर पड़ेगा। जब देश का मुख्य विपक्षी चेहरा किसी राज्य के स्थानीय मुद्दे को राष्ट्रीय मंच पर उठाता है, तो प्रशासन पर दबाव बढ़ना तय है। छात्रों के लिए यह केवल एक नियुक्ति का सवाल नहीं, बल्कि उनके वर्षों के संघर्ष और उम्मीदों का मुद्दा है। राहुल गांधी का इस मामले में कूदना यह संकेत देता है कि आने वाले समय में ‘युवा और रोजगार’ का मुद्दा सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा।




