कानपुर में साइबर अपराध की एक ऐसी परत खुली है जिसने जांच एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। 250 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन के इस मामले में पुलिस ने 50 हजार के इनामी अपराधी राजवीर और उसके साथी शिवम सन्हा को धर दबोचा है। लेकिन इस पूरे सिंडिकेट का जो असली दिमाग था, वह फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
कौन है सुल्तान मिर्जा, जो बना मास्टरमाइंड?
जांच में सामने आया है कि इस पूरे गोरखधंधे को बिहार के सासाराम का रहने वाला सुल्तान मिर्जा चला रहा था। पुलिस के अनुसार, सुल्तान मिर्जा कई छद्म नामों जैसे अभय शुक्ला, जान सेना और वैलेंटाइन का इस्तेमाल कर रहा था। बीटेक की पढ़ाई कर चुके सुल्तान के नेपाल या दुबई भागने की आशंका जताई जा रही है।
कैसे जाल बिछाया था साइबर ठगों ने?
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक, यह गिरोह बहुत ही शातिर तरीके से काम कर रहा था। इनके मॉड्यूल को समझना बेहद जरूरी है:
- म्यूल खातों का जाल: गिरोह ने 124 बैंक खातों का इस्तेमाल किया, जो एक्सिस, यूनिटी, उत्कर्ष और सीएसबी जैसे प्रमुख बैंकों में थे।
- बोगस फर्म: एमएसएमई (MSME) के नाम पर फर्जी कंपनियां बनाकर बैंकिंग सिस्टम को चकमा दिया गया।
- कैफे बना अड्डा: राजवीर ने रतनलालनगर में साइबर कैफे की आड़ में इन बोगस फर्मों और खातों का पूरा नेटवर्क संचालित किया।
मायने और प्रभाव: आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?
यह मामला केवल एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि उस खतरे की घंटी है जो हर डिजिटल यूजर के लिए है। इन लोगों ने 2021 से 2026 के बीच देश के नौ राज्यों में 1600 से अधिक साइबर शिकायतों को जन्म दिया।
आम जनता के लिए सीख: यदि आप किसी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने के लिए देते हैं या किसी अज्ञात कंपनी के नाम पर खाते खुलवाते हैं, तो आप बड़ी कानूनी मुसीबत में फंस सकते हैं। ये ठग अक्सर ‘म्यूल अकाउंट’ का इस्तेमाल आम लोगों को लालच देकर करते हैं। पुलिस ने अब तक इनके 4 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए हैं, लेकिन 250 करोड़ का यह जाल यह बताने के लिए काफी है कि डिजिटल दुनिया में आपकी सतर्कता ही आपकी सुरक्षा है।





