मानसून की पहली बारिश, और डूबा गोरखपुर
गोरखपुर में मानसून की दस्तक के साथ ही शहर की बदहाल जल निकासी व्यवस्था का सच फिर से सड़कों पर तैरता नजर आया। महज एक घंटे की तेज बारिश ने नखास, बक्शीपुर, अलीनगर और धर्मशाला जैसे व्यस्त इलाकों को तालाब में तब्दील कर दिया। लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, और सड़कों पर गाड़ियां पानी के बीच रेंगती दिखाई दीं।
निकास व्यवस्था पर उठ रहे बड़े सवाल
शहर के मुख्य बाजारों और रिहायशी इलाकों में जलभराव की समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन हर साल नगर निगम के दावों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। बक्शीपुर और नखास जैसे इलाकों में नालियों की सफाई न होना और अतिक्रमण ने जल निकासी के रास्तों को पूरी तरह से बंद कर दिया है।
- सड़कों पर घुटनों तक भरा गंदा पानी
- घरों के भीतर घुसने लगा बारिश का पानी
- ट्रैफिक जाम से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित
मायने और प्रभाव: आम जनता पर असर
यह स्थिति क्यों चिंताजनक है?
गोरखपुर जैसे बढ़ते हुए महानगर में जलभराव न केवल आवागमन को ठप करता है, बल्कि यह संक्रामक बीमारियों के फैलने का सबसे बड़ा कारण भी बनता है। हर साल करोड़ों रुपये की लागत से नालियों की सफाई का दावा किया जाता है, लेकिन बारिश का एक दौर उन दावों की पोल खोल देता है।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि जलभराव की वजह से दुकानदारी पूरी तरह चौपट हो जाती है। यदि नगर प्रशासन ने समय रहते इस जल निकासी तंत्र को दुरुस्त नहीं किया, तो आने वाले दिनों में और भी भारी बारिश के चलते शहर के कई इलाकों का संपर्क मुख्य शहर से पूरी तरह कट सकता है।





