उरई के सड़कों पर मातम पसरा है। कोटरा कस्बे के तीन होनहार दोस्तों का सफर उनके घर तक नहीं, बल्कि सीधे श्मशान तक पहुंचा। मुहर्रम का त्योहार मनाकर लौट रहे इन युवाओं की बाइक को एक बेकाबू डंपर ने ऐसी टक्कर मारी कि मौके पर ही तीन परिवारों की दुनिया उजड़ गई।
सपनों के साथ बुझ गए तीन चिराग
हादसा उस वक्त हुआ जब तीनों दोस्त देर रात अपने घर लौट रहे थे। डंपर की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि संभलने का मौका तक नहीं मिला। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और तीनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
मां की आंखों में अब सिर्फ आंसुओं का सैलाब
रात भर मांएं दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठी थीं कि उनके लाडले कब लौटेंगे। लेकिन सुबह जब दरवाजा खुला, तो सामने उनका लाल नहीं, बल्कि कफन में लिपटा हुआ शव था। कस्बे में सन्नाटा ऐसा है कि हर घर का चूल्हा ठंडा पड़ा है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और डंपर चालक की तलाश जारी है।
मायने और प्रभाव: सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह हादसा कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि सड़कों पर दौड़ती मौत का सच है। इस घटना के बाद स्थानीय जनता में गहरा आक्रोश है:
- बेकाबू रफ्तार: हाईवे और कस्बों की सड़कों पर भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।
- प्रशासन की सुस्ती: भारी वाहनों के लिए तय समय-सीमा और रूट का पालन न होना अक्सर ऐसी दर्दनाक घटनाओं का कारण बनता है।
- सुरक्षा का सवाल: क्या हम अपनी सड़कों को इतना असुरक्षित छोड़ देंगे कि घर से निकला हुआ इंसान वापस न लौट सके?
इस हादसे ने फिर साबित कर दिया है कि सड़क सुरक्षा के नियम केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर लागू होने चाहिए। वरना, उरई जैसे शहरों में ऐसे कफन आने का सिलसिला कभी नहीं थमेगा।




