शेयर मार्केट में निवेश का झांसा और करोड़ों की चपत
शेयर मार्केट के नाम पर बैंक से कई गुना अधिक रिटर्न का सपना दिखाना अब आम लोगों के लिए महंगा साबित हो रहा है। कुशीनगर के रहने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर धनन्जय शुक्ला ने एक ऐसा जाल बिछाया, जिसने यूपी समेत कई राज्यों के निवेशकों को सड़क पर ला खड़ा किया है। करीब 2 करोड़ रुपये की इस ठगी ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर से कैसे बना ‘महाठग’?
धनन्जय शुक्ला ने अपनी साख बनाने के लिए गोरखपुर और आसपास के स्कूलों में कंप्यूटर सिस्टम लगाने का काम शुरू किया। इस दौरान उसने शिक्षकों और स्कूल प्रबंधकों का भरोसा जीता। इसी भरोसे की आड़ में उसने ‘टीवीएस सॉल्यूशन’ और ‘एआईआईपीएल ट्रेडिंग’ जैसी फर्जी फर्म खड़ी कीं। उसने 18% से 30% प्रति माह ब्याज का लालच देकर लोगों से पैसे ऐंठना शुरू किया।
ऐसे डूबी लोगों की गाढ़ी कमाई
- संतलाल मौर्या (महुली): 51 लाख रुपये की चपत। उन्होंने अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर आरोपियों के बैंक खाते में रकम ट्रांसफर की थी।
- ज्ञानेश कुमार (गोरखपुर): बैंक कर्मचारी होने के बावजूद 44 लाख रुपये के लालच में फंस गए।
- अन्य पीड़ित: अब तक 16 से अधिक लोग पुलिस के पास पहुंच चुके हैं, जो अपनी जमा-पूंजी गंवा चुके हैं।
लखनऊ का मकान होगा कुर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम से धनन्जय ने बिलासपुर (छत्तीसगढ़) की अपनी पार्टनर रजनी प्रजापति के साथ मिलकर लखनऊ में 1 करोड़ रुपये का आलीशान मकान खरीदा था। अब पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द ही इस संपत्ति को जब्त किया जाएगा।
मायने और प्रभाव
यह मामला इस बात की चेतावनी है कि ‘ज्यादा रिटर्न’ के चक्कर में लोग कितनी बड़ी गलती कर बैठते हैं। जब कोई निजी फर्म शेयर बाजार के नाम पर फिक्स्ड और मोटा मुनाफा देने का वादा करे, तो समझ लीजिए कि खतरा बहुत बड़ा है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि इस गिरोह के तार त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ तक फैले हैं। आम जनता के लिए सबक साफ है—लालच में आकर अपनी मेहनत की कमाई किसी अनजान ‘निवेश कंपनी’ को न सौंपें, वरना बाद में पछतावे के सिवा कुछ नहीं बचेगा।





