कसया के निजी अस्पताल में कोहराम
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के कसया थाना क्षेत्र में एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। पुरानी फाजिलनगर रोड पर स्थित ‘लूना अस्पताल’ में गॉल ब्लैडर (पित्त की थैली) का ऑपरेशन कराने आई 26 वर्षीय युवती नरगिस की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत की खबर सुनते ही परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और अस्पताल परिसर में भारी हंगामा व तोड़फोड़ की गई।
सामान्य जांच रिपोर्ट के बाद अचानक क्या हुआ?
ग्राम भरौली की रहने वाली नरगिस को ऑपरेशन के लिए सोमवार को भर्ती कराया गया था। परिजनों का दावा है कि भर्ती से पहले हुई सभी मेडिकल जांचें बिल्कुल सामान्य थीं। मंगलवार सुबह करीब 8 बजे उसे ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, लेकिन थोड़ी ही देर बाद स्टाफ ने उसकी हालत नाजुक होने की बात कही। इसके बाद उसे आनन-फानन में गोरखपुर रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल में तोड़फोड़ और फरार हुए डॉक्टर
गोरखपुर से शव वापस लाने के बाद परिजनों ने अस्पताल पर इलाज में लापरवाही और गलत इंजेक्शन देने का आरोप लगाया। आक्रोशित भीड़ ने अस्पताल की कुर्सियां और मेडिकल उपकरण तोड़ दिए। स्थिति को बिगड़ता देख अस्पताल का स्टाफ और डॉक्टर मौके से फरार हो गए। कसया थानाध्यक्ष आशुतोष सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
मायने और प्रभाव: क्या सुरक्षित हैं प्राइवेट अस्पताल?
- जवाबदेही का संकट: कुशीनगर और आसपास के क्षेत्रों में बिना उचित व्यवस्था के चल रहे निजी अस्पतालों पर यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। क्या ऐसे अस्पतालों के पास जटिल सर्जरी के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं?
- स्वास्थ्य विभाग की भूमिका: अब सीएमओ ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन सवाल यह है कि अवैध और मानकविहीन अस्पतालों पर कार्रवाई केवल मौतों के बाद ही क्यों होती है?
- जनता के लिए सबक: यह घटना मरीजों और उनके परिजनों को सतर्क करती है कि वे किसी भी छोटे या बड़े ऑपरेशन से पहले अस्पताल की वैधता, डॉक्टरों की योग्यता और आपातकालीन सुविधाओं (ICU/Ventilator) की खुद जांच करें।
इस पूरे मामले में मृतका के दो मासूम बच्चे अनाथ हो गए हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए और दोषियों को कड़ी सजा मिले ताकि भविष्य में किसी और के साथ ऐसा हादसा न हो।





